सोमवार, 8 जून 2009

कलाकार कभी मरते नहीं ...


हबीब तनवीर चले गए....
...एक पत्रकार के तौर पर मेरी हमेशा से ये तमन्ना थी...कि मैं हबीब तनवीर का इंटरव्यूह करू...लेकिन तनवीर के साथ मेरा वो सपना भी चला गया...खुदा उनकी रूह को सुकून और उनको जन्नत नसीब करे...वैसे हबीब तनवीर के बारे में मैं उतना नहीं जानती लेकिन.. हां उनके जितने भी नाटक देखे और पढ़े है...वो बेहद दिल के क़रीब रहे हैं...तनवीर का नाटक आगरा बाज़ार के साथ तो बचपन की यादें भी जुड़ी हैं....आगरा बाज़ार वो नाटक कहीये या धारावाहीक जिसे मैंनें बहुत ही दिलचस्पी से साथ देखा था... उन्होंने एक हिन्दू लड़की से शादी की थी...वैसे वो क्या अपने क्या दूसरे धर्म में उनकी कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी...लेकिन उनका जो धर्म था....वो बहुत ही खूबसूरत था... बहुत ही सच्चा था...वो था एक कलाकार का...एक इंसान का...कहते है इंसान की लेखनी उसके व्यक्तित्व का आइना होता है...और हबीब की अभीव्यक्ति बहुत ही सशक्त थी...उनकी दुनिया से रुखसती पर सब की तरह मैं भी बहुत ग़मगीन हूं लेकिन ....वो हमेशा हमेशा ज़िन्दा रहेंगे ये मैं अच्छी तरह से जानती हूं क्योंकि...कलाकार कभी मरते नहीं....

1 टिप्पणी:

जय प्रकाश 'जेपी' ने कहा…

आपकी स्पष्ट अभिव्यक्ति...नाटक और लेख से अपनी यादों को जोड़ कर देखना...ये कुछ पंतियां आपके व्यक्तित्व का परिचय कराने के लिए काफी है....वैसे आपकी हर लेखनी मै पढ़ता हूं....तो मै उसमे अपना जीवन...और अपनी दुनिया से जोड़कर झाकने लगता हूं.....शायद हर पाठक अपने संस्मरणों में खो जाता होगा...या फिर अपनी यादों से जोड़ देखता होगा....अपने से जोड़ कर देख लेना...एक लेखक के लेखन की सार्थकत्ता होती है.....।