सोमवार, 15 दिसंबर 2008

बड़ी बेआबरु हो कर तेरे कूचे से निकले.....

बड़ी बेआबरु हो के तेरे कूचे से हम निकले...बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले.....
जी हां ये शेर मै बुश साहब कि हालत पर कहना चाहती हूं जनाब जाते जाते जूता खा गए.....फिर वो बात अलग है कि अंकल सैम बातों को संभालना बखूबी जानते है तो इस मसले को भी हसीं मे उड़ा दिया...वैसे अंकल ठीक ही किया...क्योंकि पुरी दुनिया अगर हंसे और आप ना हंसे तो कुछ बेतुका हो जाता....बस अफसोस है तो अल-जैदी का बेचारा खुद पर काबू ना कर सका और कर बैठा मनमर्जी....वैसे जैदी साहब मैं माफी चाहती हूं कि मैंने आप को बेचारा कहा....वैसे आप तो रातों रात मेरे हीरो बन गए....मैं खुद को डरते डरते पत्रकार मानती हूं पर ....इतनी हिम्मत मुझ में नहीं जितनी आप में हैं.....क्योंकि आप ने दिखा दिया पत्रकार का दमगा तो हर कोई टांग लेता है पर इस तमगे को चरितार्थ कोई कोई कर पाता है...आज ये पेशा कमाने खाने का एक रोजगार भर बन कर रह गया है...ये जज्बा बुहत ही कम लोगो के पास होता है...जी हां अपने देश का दर्द जानने महसूस करने और उसका बदला लेने का मद्दा.....बहुत कम ही बगैरवर्दी के लोगों के पास होता है......कुल मिला कर यही कहना चाहती हूं अंकल सैम...आप की रुखसती इराक से इस कद्र होगी ये तो आप ने कभी सोचा भी नहीं होगा.....अल जैदी साहब आप को मेरा सलाम.....खुदा करे आप के इस जज्बा का एक ज़र्रा मुझ में भी खुदा दे दे......शुक्रिया....................नाज़मा

6 टिप्‍पणियां:

bijnior district ने कहा…

आपने बिलकुल सही लिखा! जूता मारकर एक व्यकति ने यह बता दिया कि दुनिया बुश से कितना घृणा करती है।
आपका हिंदी लिखाडि़यो की दुनिया में स्वागत । खूब लिखें। अच्छा लिखे। शुभकामनांए..
एक अनुरोध सैटिंग में जाकर वर्ड वैरिफिकेशन हटा दें। इससे टिप्पणी करने मे परेशानी होती है।

Manoj Kumar Soni ने कहा…

सच कहा है

हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .(हटाने के लिये देखे http://www.manojsoni.co.nr )
कृपया मेरा भी ब्लाग देखे और टिप्पणी दे
http://www.manojsoni.co.nr

Unknown ने कहा…

bahut bahdiya...blog jagat main aapka swaagat hai..aise he likhte rahe....

bhootnath ने कहा…

...........................बस एक ही बात कहूँगा भाई....कि देश से बहुतारह प्यार करने वाले इन्सानों के पास जब कोई चारा नहीं बचता तब वे ऐसे कृत्य करने को विवश हो जाते हैं... हजारों ऐसी घटनाएं हैं जहाँ एक अपराधी को दंड नहीं मिला.....अंत में जनता ने हिंसा द्वारा...रक्तपात द्वारा बात का उपसंहार किया.......इसे ग़लत नहीं ठराया जा सकता.......सच तो यह है कि तमाम पढ़े-लिखे लोग तो अपना भविष्य...अपनी नौकरी....मानवाधिकार...और ना जाने कितने ही अनजान कारणों से जरुरी कदम नहीं उठाते....मामला सर से बहुत ऊपर जा पहुंचता है...और तमाम विद्वान-विज्ञ जन चीख-पुकार मचाते रह जाते हैं....अंत में जनता अपना फैसला देती है....तब हम फिर चीखने लग जाएँ...कि हाय-हाय ये तो ग़लत हुआ..... ये तो ग़लत हुआ..... अरे भई जब मब कुछ कबाड़ नहीं पाते तो जो कुछ लोग कुछ कबाड़ने की चेष्टा करते हैं...तो उन्हें करने ही दें ना...ये दरअसल उत्तेजना भर नहीं है....आप देखियेगा भारत में आगे इससे भी बुरा होने जा रहा है....मेरे देखे तो भारत की सड़कों पर तरह-तरह के राजनीतिक अपराधी ,जो तमाम सबूतों के मद्देनज़र और जनता तथा मीडिया की नज़र में पुख्ता तौर पर अपराधी हैं,दौड़ा- दौड़ा कर मारे जाने वाले हैं...और सम्भव है कि उनका नेतृत्व मेरे या आपके बीच ही के कुछ लोग कर रहे हों...या ख़ुद हम ही हों....!!!! असल में भाई सब्र की भी एक इन्तहां होती है....भारत के सन्दर्भ में वो इन्तेहाँ अब ख़त्म होने को आई है....या ख़त्म हो ही चुकी है...अपराधी मन- चले व्यभिचारी सांडों की तरह छुट्टे घूम रहें हैं....और भारत के हर महकमे में...सड़क पर....घर में...हर जगह पर भारत माता का बलात्कार करते...उसकी आत्मा को कचोटते....उसका चीरहरण...उसका मान-मर्दन करते...और उसकी मासूम संतानों पर घनघोर अत्याचार करते राक्षसों की भाति अट्टहास करते....फुफकार करते... अपने अंहकार-शक्ति-धन आदि का फूहड़ प्रदर्शन करते.....विद्रूप रचते.....गोया कि सत्ता के अंधे मद में अपने लिंग का प्रदशन करते घूम रहे हैं...इस सत्ता को कौन जवाब देगा....जनता ही ना.....झारखंड के सन्दर्भ में तो यह तथ्य और भी बेबाक और अश्लीलता की हद से भी गया-बीता या नंगा है....तो इसका इलाज आख़िर क्या है...!!सच जानिए भाई....जनता इन सबको सरेआम पूरी तरह नंगा करके इतना मारेगी-इतना मारेगी कि इनकी सात पुश्त तक की संताने भी प्रदर्शन नाम की चीज़ क्या होती है....यह तक भूल जायेगी....हम और आप जैसे लोग सभ्यता के नाम पर चीखते ही रह जायेंगे कि हाय..हाय ये तो ग़लत है...ये तो ग़लत है....!! अंत में सच तो यही है....परिवर्तन के बारे में हम जैसे लोग सिर्फ़ सोचते हैं....परिवर्तन तो अंततः जनता ही करती है.....करती है ना.....!!!

Alpana Verma ने कहा…

आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है


शुभकामनाएं

'word verification' tippani likhne walon ko hatotsahit karta hai--[2 baar main hi fail ho gayee word verificaion mein.]

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" ने कहा…

हिंदी चिट्ठाजगत मे आपका हार्दिक स्वागत है
खूब लिखें,अच्छा लिखें